अनुभूति 1 1(1) विमल की शादी मेंऔर रौनक और छाया का आगमन
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शहर के बड़े आढ़तिया गंगापंत के बेटे विमल की बारात के लिए सभी प्रतिष्ठित जन, एकत्रित हो रहे थे और गंगापंत को शुभकामनाएं दे रहे थे ।
दूल्हा बना विमल किसी राजकुमार के जैसे लग रहा था ।
उस समय गंगापंत अन्य बारातियों के साथ बातें करने में मशगूल थे पर जैसे ही उन्होनें उनको देखा, वह लपकते हुए उनके पास आए ।
"अरे…! आइए - आइए रौनक जी…..!! आइए आपका और आप सभी लोगों का बहुत - बहुत स्वागत है.....! माताजी नहीं आईं......?"
"उनको न लाने पाने के लिए क्षमा चाहता हूं…..!" अपने दोनों हाथ जोड़कर रौनक ने गंगापंत जी से विनय भरे शब्दों में कहा ।
"चलो कोई बात नहीं....! माताजी तो ठीक हैं न....!!"
"जी....... ठीक हैं.....! उनकी दवाइयों का समय ही ऐसा है कि रात में ज्यादा देर तक जाग नहीं पातीं हैं।"
अपने दोनों हाथ जोड़े - जोड़े ही गंगापंत मुस्कराए ।
उन्होंने अपनी पत्नी कृष्णा और पुत्री डाक्टर तारिका से उन सबका परिचय कराया।
रौनक, फुड सप्लाई विभाग में सुपरीडेंटेण्ड के पद पर अभी - अभी स्थानांतरित होकर रायपुर से आए थे और इस शहर में सर्वथा नए थे ।
छाया, ग्रहिणी थीं, वृंदा शासकीय विद्यालय में सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं को भूगोल का अध्यापन करातीं थीं तथा उसी विषय में पीएचडी भी कर रहीं थीं; तन्मय अभी कक्षा आठ में था
गंगापंत उन सभी का स्वागत करत हुए उन्हें साथ लेकर जयमाला मंच की ओर आ गए थे ।
सार्वजनिक और व्यक्तिगत तौर पर वह सबसे पहली बार ही मिल रहे थे ।
बारात लग रही थी; सभी लोग नाचते-गाते विवाह स्थल में जाने के लिए तैयार हो रहे थे ।
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