अनुभूति 1 [1 (3) ] छाया और सरितकान्त के परिवारों का आपस में मिलना

 

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डाक्टर तारिका न जाने कितनी बार अपने भाई विमल की बलैया ले चुकीं थीं ।

सहबाला के तौर पर जय, विमल के साथ - साथ दो घोड़ों से जुती बग्घी से उतरा तब तक दरवाजे पर पण्डित जी के साथ दुल्हन के पिता कीर्तीचंद्र, गंगापंत और उनके साथ आये सभी बारातियों का स्वागत कर रहे थे और सभी को सादर पूर्वक जयमाला मंडप की ओर आने का निवेदन कर रहे थे ।

सभी बाराती अपने - अपने परिचितों से मिलने लगे थे ।

मुख्यद्वार पर पण्डित जी और कीर्तीचंद्र औपचारिकताओं को पूरा करके दूल्हे विमल, जय और विमल के दोस्तों को जयमाला मंच पर ले आए ।

डाक्टर तारिका विशेष तौर पर मंच का कार्यक्रम देखते हुए दुल्हे को जयमाला मंच आते देख दुल्हन को वरमाला में लाने की तैयारी में लगीं थीं ।

कृष्णा, छाया और वृंदा को लेकर स्त्रियों के समूह में चलीं गईं थीं; तन्मय, डीजे के डांस स्टेज पर अन्य बच्चों के साथ नाचने लगा था और गंगापंत रौनक को शहर के खास मेहमानों से मिलवाने के लिए चले गए थे।

खास मेहमानों में परिवार सहित रंजन लोहित (पत्नी आरती, पुत्र जय और पुत्री सिया), विनय प्रकाश (पत्नी दीर्घा, पुत्र अनिमेष और पुत्री 

अन्वेषा) भी निमंत्रित थे।

होटल सम्राट, होटल गुलशन, होटल इतवारी के मालिक, क्षेत्र के विधायक आदि बहुत से अन्य मेहमान भी थे, जिनका परिचय गंगापंत,

रौनक से करवा रहे थे।

विधायकजी को किसी अन्य पार्टी में जाना था इसलिए वह जल्दी चले गए।

दूसरे शहर से अभी स्थानांतरित होने के कारण रौनक इन सभी लोगों को नहीं जानता था ।

सरितकान्त तब तक उनके पास आ गए थे तब गंगापंत ने सरितकान्त  का रौनक, छाया, वृंदा और तन्मय का परिचय कराया।

आपस में परिचय करते समय जब छाया और सरितकान्त ने एक दूसरे को देखा तो मन ही मन एक दूसरे का दिल से अभिवादन किया ।

दोनों हाथ जोड़कर छाया के नमस्कार करने की अदा से सरितकान्त इतने प्रभावित हुए थे जिनको शब्दों में बता पाना मुश्किल है ।

छाया पर सरितकान्त के व्यक्तित्व का बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ गया था।

इन सभी लोगों को एक साथ देखकर कमलेश, कनक और सुबोध भी आ गए थे ।

अब अपने परिवार का  परिचय सरितकान्त, रौनक और उनके परिवार से करा रहे थे तन्मय, कनक और सुबोध से जल्दी ही 

हिल - मिल गया था ।

कमलेश, छाया और वृंदा से इतनी आत्मीयता से मिली कि विश्वास ही नहीं हो रहा था  कि वह सब पहली बार मिल रहे हैं ।

इन सभी लोगों में सरितकान्त और रौनक ही बहुत देर तक बातें कर रहे थे .

और होता भी यही है कि किसी भी पार्टी में या कहीं भी जब बहुत सारे लोगों से एक साथ परिचय होता है तो उनमें एक या 

दो लोगों से ही घनिष्टता हो पाती है बाकि लोगों से सिर्फ़ औपचारिकता ही रहती है ।

इधर भी ऐसा ही हुआ; इनमें सरितकान्त और रौनक के बीच बहुत ही सारगर्भित विचार - विनिमय हुए अतः पहली ही मुलाकात में 

वह एक दूसरे के विचारों से बहुत ही प्रभावित लग रहे थे ।

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